MP News: मध्यप्रदेश के भोपाल में एक महीने की बेटी की हत्या करने वाली मां को कोर्ट ने गुरुवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आरोपी को बेटे की चाह थी। लड़की होने पर उसे 4 साल पहले पानी की टंकी में डुबोकर मार डाला था। भोपाल जिला कोर्ट ने 4 साल पुराने मामले में मां को दोषी करार देते हुए सजा के साथ जुर्माना भी लगाया है।
कोर्ट ने क्या कहा ?
भोपाल जिला कोर्ट ने 27 फरवरी के एकअहम फैसला सुनाया। जिसमें कोर्ट ने मासूम बेटी को पानी में डुबोकर मारने वाली मां को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
भोपाल के 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने 104 पेज के फैसले में कवि रविंद्र नाथ टैगोर की इन पंक्तियों को शामिल किया।
जिसमें कहा गया- जब एक पुत्री का जन्म होता है तो यह इस बात का निश्चायक सबूत है, कि ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है, क्योंकि ईश्वर पुत्रियों के माध्यम से स्वयं को साकार रूप देता है। वर्तमान में पुत्रियां सभ्यता, सस्ंकृति और राष्ट्र निर्माण का सशक्त हस्ताक्षर हैं। शास्त्रों में पुत्रियों को हृदयों का बंधन, भावों का स्पंदन, सृजन का आधार, भक्ति का आकार और संस्कृति का संस्कार माना गया है।
ये है पूरा मामला
प्लास्टिक के ड्रम में मिली थी लाश
एक माह की किंजल मेवाड़ा ग्राम डहरिया थाना खजूरी निवासी सचिन मेवाड़ा की बेटी थी। सचिन गांव में खेती करता है और उसकी शादी लगभग 14 महीने पहले हुई थी। 16 सितंबर 2020 दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सचिन की एक माह की मासूम अचानक लापता हो गई। पत्नी से पूछने पर उसने कहा कि बच्ची को प्रेत आत्माएं ले गई हैं। परिजनों ने तलाश शुरू की तो करीब चार बजे उसकी बॉडी प्लास्टिक के एक पानी के ड्रम में मिली। ड्रम का ढक्कन बंद कर दिया गया था।
बेटे की था आस, बेटी होने पर करने लगी नफरत
बच्ची को आखिरी बार मां के साथ कमरे में देखा गया था। जबकि सचिन की मां और अन्य परिजन अपने-अपने कमरों में थे। खजूरी थाने के तत्कालीन टीआई एलडी मिश्रा का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह साफ था कि बच्ची की हत्या की गई है। शक की सुई उसकी मां पर थी। जांच के बाद मां को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मां सरिता बाई मेवाड़ा ने बताया था कि उसे लड़के की चाहत थी। लड़की पैदा होने पर उसे बच्ची से नफरत हो गई थी। इसी के चलते उसने बेटी की हत्या की।
सचिन बोला- बेटी को देखकर खुद को कोसती थी सरिता
बच्ची के पिता सचिन मेवाड़ा ने बताया था कि उसने अपनी पत्नी सरिता से पूछताछ किया तो वह रोने लगी और बोली कि उसने ही अपनी लड़की किंजल को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया था। सरिता ने सोचा था कि उसे लड़का होगा, लेकिन लड़की हुई तो उसे लड़की से कोई प्रेम नहीं था। वह जब-जब उसे देखती थी तो अपने आप को कोसने लगती थी। इसलिए उस समय घर में कोई नहीं होने का मौका पाकर किंजल को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया और डर के कारण किसी को यह बात नहीं बताई।
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